शुक्रवार, 13 मई 2016

चस्का फेसबुक का

दुनिया में कुछ हम जैसे प्राणी भी होते हैं, जिन्हें कभी भी मेहनत नहीं करनी पड़ती है सोने के लिए। निंद्रा देवी की असीम अनुकम्पा रहती है। उनके लिए सोना, सोने-चाँदी से भी बहुमूल्य होता है, जब मौका मिला नहीं कि सो गए, जैसे जीवन में पुण्य कमाने का यही एकमेव तरीका बताया है इश्वर ने।

यूँ तो हमारी नायिका को भी निंद्रा देवी की ऐसे ही कृपा प्राप्त थी, पर आज निंद्रा रानी, किसी नयी नवेली दुल्हन की तरह नखरे दिखा रही थी या फिर किसी कारण वश अपने इस अनन्य भक्त से रूष्ट हो गई थी।

अबकी बार सो जाने का निश्चय करते हुए दोनों आँखों को भींच कर बंद कर लिया था। पिछले दो घंटे से सोने के सारे उपाय आजमा कर देख लिए थे, आधे घंटे के कसमकस के बाद भी जब निंद्रा देवी ने दया नहीं दिखाई तो, बत्ती जलाकर फेसबुक आन करके बैठ गयी। दुनिया भर में कैसा भी गम हो, फेसबुक पर निर्झर झरने की तरह कलकल करता विचारों और ज्ञान का प्रवाह अविरल रूप से प्रवाहित होता रहता है। अकेलेपन की व्यक्तिगत समस्या से लेकर देश की गरीबी जैसी व्यापक समस्याओं से काल्पनिक रूप से निजात दिलाने वाले समाज सुघारक और चिंतकों की बारात जरूर उपलब्ध हो जाएगी।

कुछ लोग तो मनीषा कोईराला टाइप भूली बिसरी हीरोइनों का चित्र प्रोफाइल पिक्चर पर लगा कर असीम शांति और सुख का अनुभव करते हैं, मानों उनका उद्धार कर दिया हो। सागर की लहरों की तरह उभरते नये जमाने के विचारों, और पी. जे. की आयी बाढ़ को पढ़ते और शेयर करते वक्त का पता ही नहीं चलता है।

अपनी नायिका का ही उदाहरण ले लेते हैं। चाहे गरमी की छुट्टियां हो या एग्जाम फिवर मोहतरमा तो फेसबुक फीवर से ही ग्रसित है। नींद से छुट्टियां पाते ही नये मोबाइल एस ३ के साथ बन जाती है फेसबुकिया समाजसुधारक । नये पीढ़ी के स्मार्ट फोन की नई फसल ने तो मानों सारे गुड़ गोबर करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है, वरना हमारे जमाने में तो एस३ ट्रेन के कोच पर लिखे होते थे।

आजकल तो प्यार का भूत भी फेसबुक पर ही चढ़ता है। हजारों लाखों की संख्या में युवा एक दूसरे से मन भर चैटियाते रहते हैं। प्यार की कबड्डी फेसबुक के मैदान पर खेलकर जीतने की कोशिश में कई शहीद होकर बर्बाद भी हो जाते हैं। कुछ लोग तो हमारी नायिका की तरह होते हैं, बड़े ही आवारा और फोकटिया किस्म के लड़के, जिन्हें कभी कोई लड़की घास नहीं डालती है। ऐसे लोगों को फेसबुक पर किसी सुंदर माडल का फोटो प्रोफाईल पिक्चर सेट कर, कोई सुंदर सा लड़की का नाम रखकर, स्त्री चरित्र की चादर ओढ़े, आए दिन रोमियो बने आशिकों के साथ चुहलबाजी करते इनको बड़ा मज़ा आता है। प्यार की एक बूँद को तरसते इन आनलाइन रोमियो को यूँ चकमा देकर मानों प्रेम की ए. बी. सी. मे हुए हार का बदला ले कर जीत मे बदल रहे हों।

कुल मिलाकर अगर हमारी आज की काल्पनिक फेसबुकिया नायिका की तरह लोग अपना समय फोेसबुक और व्हाट्स अप पर लुटाते रहे, तो वह दिन दूर नहीं जब आई. आई. टी. एम. जैसी प्रसिद्ध प्रबंधन संस्थान, मानव संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में "फेसबुक और व्हाटस अप" जैसे मैसेंजर से नफरत करने का नया अध्याय जोडकर और इंटरनेट के इस भँवर में जीवन बर्बाद कर रहे युवा पीढ़ी को एक अवतार की तरह बचा रहे होंगे।

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